Posts

Showing posts with the label कविता

चिड़ियों की बातें

Image
*चिड़ियों की बातें सहम गए यूँ सारे पक्षी। चीं चीं करना छोड़ दिये।। मानव के हालात देखकर। रब से रिश्ता तोड़ दिये।। एक डाल पर बैठे सारे। मन ही मन क्या सोच रहें। भूख लगी है फिर भी देखो। जाने से संकोच रहें।। फैल रहा है कहर शहर में। हर तरफ मौत साया है। पक्षी सारे सहम गये है। ये कैसा दिन आया है।। एक दुजे को देख देख कर। अपनी भाषा बोल रहें। मिल कर बैठे सारे साथी। उलझन सारी खोल रहें।। प्रिया देवांगन *प्रियू* छत्तीसगढ़

तिरंगा हम फहरायेंगे

Image
  तिरंगा हम फहरायेंगे तीन रंगों से बना तिरंगा , आज उसे फहराएंगे। देखो भारत की चोटी पर , शान से हम लहरायेंगे।। नही झुकने देंगे तिरंगा , इसका मान बढ़ाएंगे। वीर सपूतों के आगे हम , अपना शीश झुकायेंगे।। चन्द्रशेखर और भगत सिंह का , नारा हम लगाएंगे। भारत माता की जय बोलकर , अपना शीश नवाएँगे।। भारत माँ की रक्षा खातिर  , हम शहीद हो जाएंगे। आँच नहीं  आने देंगे हम , सीमा पर डट जाएंगे।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़

समय

Image
  समय ****** समय समय की बात है , समय बड़ा अनमोल। समय से जो न होत है , उसका नही है मोल।। समय से ही कार्य करो , मिलेगा समय मे फल। सफलता सभी को मिलेगी  , आज नही तो कल।। समय के इस मोल को , समझ जाओ अब। समय निकल जाए तो , मौका मिलेगा कब।। जीवन मे आगे बढ़ना है तो , समय का कर उपयोग। सफलता तेरे हाथ मे है , इसका कर सदुपयोग।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया PRIYADEWANGANPRIYU

राखी के तिहार

Image
राखी के तिहार ************** सुन्ना होगे मोर घर अँगना ,सुन्ना होगे मोर दुवारी। एसो के राखी में भइया ,कइसे सजाहू तोर बर थारी।। देखत रेहेंव रस्ता तोरे , मोर भइया हा आही। आ के अपन कलाई म , मोर से राखी बन्धवाही।। किसम किसम के मिठाई अउ , मेवा ल खवाहू। दीपक अउ टिका ल , थारी में सुग्घर सजाहू।। मन ह मोर उदास होगे , सुन्ना होगे मोर दुवारी। एसो के राखी में भइया , कइसे सजाहू तोर बार थारी।। जब ले आहे कोरोना ह , कुछु तिहार बने नई लागत। अतेक दिन तो होगे संगी , बीमारी काबर नई भागत।। सिट्ठा सिट्ठा लागत तिहार , मजा नइ आवत हे। रोटी पिठा चीला सोहारी , कुछु नइ भावत हे।। काबर नइ आवत हस भइया , एसो के राखी म। रास्ता देखत देखत भर गे , पानी मोर आँखी म।। मन मोर उदास होगे , सुन्ना होगे मोर दुवारी। एसो के राखी मे भइया , कइसे सजाहू तोर बर थारी।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़

बचपन

Image
बचपन  ********* बचपन कितना सुहाना था  , सुबह होती स्कूल जाते । थक कर आते , फिर भी खेलने जाते ।। न किसी का बोझ सहना , न किसी  पर बोझ थे हम। छोटी छोटी बातों में रोना , छोटी सी बातों में हँसते थे हम।। न रोने की वजह थी ,न हँसने का बहाना था। बारिश की फुहार से , खेलना अच्छा लगता था।। कागज की नाव बना कर , कितने खुश हो जाते थे। बच्चों के संग मम्मी पापा, बच्चे बन जाते थे।। थोड़ी सी बातों में रूठना, फिर सबका मनाना कितना अच्छा लगता था। न किसी की फिक्र थी , न किसी का गम था।। कहां गया वो बचपन हमारा , जिसमें खुशियों का खजाना था। बचपन कितना सुहाना था , बचपन कितना सुहाना था ।। प्रिया देवांगन " प्रियू"  राजिम जिला - गरियाबंद (छत्तीसगढ़) PRIYADEWANGANPRIYU

मेरी डायरी

Image
मेरी डायरी *********** गर्मी के तपन धूप में भी , काम करते हैं वे लोग। जीवन के कठिन डगर में , हौसला रखते हैं वे लोग।। कितना मुश्किल हो गया है , एक एक पल जीना। कैसे रहतें है वो लोग , अपने परिवारों के बिना।। मैं उस इंसान के बारे में , दर्द ए बयां करती हूँ। अपनी डायरी के पन्नो में ,  हौसला कैद करती हूँ।। आज महामारी के जंग से , यही लोग लड़ रहे हैं। अपनी जिंदगी जीने के लिये , आज उमड़ रहे हैं।। अस्पतालों में भगवान का रूप , लिये खड़े हैं। कोरोना को हराने के लिये , सभी लोग अड़े है।। देश के वीर जवान और डॉक्टरों को नमन करती हूं। अपनी डायरी के पन्नों में ,  हौसला कैद करती हूँ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ PRIYADEWANGANPRIYU

हरेली तिहार

Image
हरेली तिहार आ गे  *************** हरेली तिहार हा आगे संगी ,  हरियाली हा छाये । रापा कुदारी धरके संगी , खेत डहर सब जाये।। हरेली के तिहार ल , किसान खुशी से मनाथे । बिहनिया ले उठ के सब , चीला चढ़ाये ल जाथे।। हाँसी खुशी से तिहार मनाथे , धरती के पूजा करथे। झन होवय नुकसान कहिके,  प्रार्थना सब झन करथे।। सांप हा आथे कहिके , खेत मा दूध मढ़ाथे । दूध ल देखथे ताहन , बिलई पी के भाग जाथे।। बिहनिया ले उठ के लइका , डारा खोंचे ला जाथे । डारा खोंचके लइका मन , पइसा अब्बड़ पाथे ।। गेड़ी चढ़े के तिहार हरे संगी  , साल मा एक बार आथे। सबो लइका जुर मिल के  , गेड़ी तिहार मनाथे।। रचना  प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया PRIYADEWANGANPRIYU

कोरोना से डरो नही

Image
कोरोना से डरो नहीं **************** फैल रहा है कोरोना वाइरस , इसका तुम करो उपाय। बीमारी को तुम दूर भगाओ , ठंडा चीज को हाथ न लगाओ।। गर्म चीज का करो तुम सेवन , स्वास्थ रहेगा तुम्हारा जीवन। हाय हैलो से मुँह को मोड़ो , नमस्ते से तुम नाता जोड़ो। भीड़ भाड़ में नही है जाना , वाइरस को दूर भगाना।। नाक कान को ढक कर चलना , हाथ को साबुन से मलना।। सर्दी खासी है इसके लक्षण , मांस का तुम करो न भक्षण। खान पान का ध्यान तुम रखना , ठंडी चीज को नही है चखना।। सर्दी खासी आये तो , डॉक्टर पास तुरंत है जाना। कोरोना वाइरस को  दूर भगाना।। कोरोना है महामारी रोग , सुबह शाम करो तुम योग। कोरोना को सब दूर भगाओ , सादा जीवन को अपनाओ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ PRIYADEWANGANPRIYU

किशन कन्हैया

Image
किशन कन्हैया  ****************** किशन कन्हैया मुरली बजैया , सब के मन को भाये।  गोपियों  संग घूम घूम के,  दही और मक्खन खाये। रास रचैया किशन कन्हैया,  सबको बहुत नचाये ।  सब लोगों के दिलों में बसे , सबको खुश कर जाये । मुरली की आवाज सुनाकर, मन को शांत कराये । गायों के संग घूम घूम कर , ग्वाला वह कहलाये। गोपियो को छेड़े कन्हैया , सबको खूब तरसाये। नटखट कन्हैया बंशी बजैया , माखनचोर कलहाये । सब कष्टो को दूर करे वह , संकट हरण कहलाये । राधा के संग नाचे कन्हैया  , संग में रास रचाये । कदम्ब  पेड़ पर बैठ  कन्हैया , मुरली मधुर बजाये खेल खेल मे किशन कन्हैया  , राक्षसो को मार गिराये । लोगों के रक्षा खातिर , गोवर्धन को उठाये । इन्द्र देव के कोप से,  सबका जीवन बचाये । प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  जिला -- कबीरधाम  छत्तीसगढ़  PRIYADEWANGANPRIYU

काश मैं पंछी होती

Image
काश मैं पंछी होती **************** काश मैं एक पंछी होती, मस्त गगन मे उड़ जाती । ताजा ताजा फल खाती, सबको मीठी गीत सुनाती । जग की पूरी सैर करती, नये नये दोस्त बनाती । नदी झील की पानी पीती, वन उपवन में घूम आती । सुबह से उठ कर मैं चहचहाती, मीठी नींद से सबको जगाती । सबके मन मे जगह बनाती, जीवन मे खुशियाँ मैं लाती । उड़ कर अपनी मंजिल पाती, हर मंजिल मैं उड़कर जाती । फल फूल मैं खूब खाती, बच्चों के पास आ जाती । काश मैं एक पंछी होती, मस्त गगन में उड़ पाती । प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priyadewanganpriyu

कोरोना

Image
कोरोना ******* कोरोना के  महामारी ने , सबको परेशान कर डाला। अच्छे अच्छे सभी लोगो को , निगल के मार डाला।। भटक रहे हैं राही सभी , अपने घर जाने को। तरस रहें है आज सभी , एक एक अन्न खाने को।। कैसे जाये अपने घर , सोंच रहें हैं सभी मजदूर। पैदल चल कर जा रहें , हो कर के सभी मजबूर।। आज हिम्मत जुटा के , सड़कों पर आयें है। धीरे धीरे चल कर लोग , हिम्मत सभी जुटायें हैं।। एक दूसरे का सहयोग करके , जनता को जगाना हैं। घर पर रह कर लोगो को , बीमारी दूर भगाना हैं।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  Priyadewanganpriyu