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Showing posts from September, 2020

मेरा मुर्गा

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  "मुर्गा बाँग लगाता है" *************** उठो प्यारे आँखे खोलो । सूरज दादा आये है।। लाल लाल किरणों के सँग में। सब में आश जगाये है।। मेरा मुर्गा है अलबेला। जल्दी से उठ जाता है।। कुड़कूँ कूँ आवाज लगा कर। नया सन्देश लाता है।। सुबह सुबह छत में चढ़ कर वह। कुकडू कूँ चिल्लाता है।। मुर्गी देखे मुर्गा राजा। गीत नया वह गाता है।। मुर्गियों का होता राजा। सैर रोज वह करता है।। चारे चुगता रहता दिनभर। फिर आहे वह भरता है।। सिर के ऊपर कलगी रखता। दिन भर  वह इठलाता है।। कूड़े कचरे में जा कर के। दाना खा कर आता है।। चूजों को अपने सँग लेकर। बड़े मजे से आता है।। सुबह सुबह जल्दी उठ कर के। मुर्गा बाँग लगाता है।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

कोरोना

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  छन्न पकैया (कोरोना) ****************** छन्न पकैया छन्न पकैया , आया है कोरोना बच्चे बूढ़े घर में बैठे , शुरू हुआ है रोना।। छन्न पकैया छन्न पकैया , अपना मुँहूँ छुपाये। बन्द हो गया आना जाना , दूरी सभी बनाये।। छन्न पकैया छन्न पकैया ,गर्म पियो सब पानी। करो नीम तुलसी का सेवन , इससे है जिनगानी।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मुँह में मास्क लगाना। कोरोना का काल चल रहा , सभी स्वच्छ अपनाना। छन्न पकैया छन्न पकैया , घर का भोजन खाना। दूध दही का सेवन करना ,तन को स्वस्थ बनाना।। प्रिया देवांगन *प्रियू* पंडरिया छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

बाढ़

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  "बाढ़" ****** प्रकृति का यही नियम है कि हर साल सभी जगहों पर बारिश होता है।हर साल कही न कही बाढ़ जैसे समस्या उत्पन्न होती है। हर साल सुनने को मिलता है कि किसी का घर बाढ़ आने से बह गया। कही किसी के बच्चें बाढ़ आने से अपने - अपने माँ - बाप , भाई- बहन से बिछुड़ गए। अक्सर यही सब सुनने को मिलता है । मछुवारें लोग ज्यादा से ज्यादा नदी या समुद्र के किनारे घर या छोटी सी झोपड़ी बना के रहते हैं । तेज बारिश होने के कारण समुद्र में उफान आने के कारण बाढ़ में लोग बह जाते हैं।  बारिश होने का इंतजार सभी लोग करते हैं।लेकिन जरूरत से ज्यादा बारिश हर लोगो को चिंताग्रस्त कर देता है। (मैं एक छोटी सी कहानी अपने लेख के द्वारा आप सभी को बताना चाहती हूँ) जब से सावन लगा था तब से पानी का गिरना बंद हो गया था। मैं और मेरे पिता जी अक्सर कहा करते थे कि ये तो सावन नही गर्मी का दिन लग रहा है । बहुत ही धूप और गर्मी रहता था। सावन में कभी कभी हल्का हल्का ही बारिश होता था। सावन खत्म होने के बाद अगस्त के महीने की शुरुआत हुई । अच्छा खासा सभी का दिन निकल रहा था। कभी हल्की हल्की बारिश की फुहार तो कभी ठंडी ठंडी हवा तो कभी सौ...

बरसात

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  "बरसात"(दोहा) *************** मानसून है आ गया , छाय घटा घनघोर। बिजली कड़के जोर से , वन में नाचे मोर।। पानी गिरते रोज के , हर्षित हुए किसान। उपजाते है खेत में , लहराते हैं धान।। चली हवाएँ जोर से , पक्षी करते शोर। चले किसानी कार्य को , होते ही वह भोर।। झूमें गायें लोग सब , आते ही बरसात । फसल उगाने आज सब , करे कार्य दिन रात।। मानसून की आहटें , मन को खुश कर जाय। हरियाली चहुँ ओर हैं , फसलें भी लहराय।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan "Priyu"