आल्हा छंद
"आल्हा छंद" *माटी जीवन परिचय* *माटी* ओम प्रकाश कहावय, धरती माँ के पूत सुजान। गाँव बोरसी पावन धरती, महकाइस जे स्वर्ग समान।। जन्मभूमि मा बचपन बीतिस, मानय माटी ला वो शान। धूर्रा माटी खेल कूद के, कदम बढ़ाइस सीना तान।। करिस पढ़ाई ध्यान लगा के, रहिस छात्र सुग्घर हुसियार। दिल जीतिस हे गुरुजी मन के, पाइस सब के प्यार दुलार।। कक्षा पंचम पहुँचत-पहुँचत, होगे साहित्य ले अनुराग। गीत कहानी रचे लगिस अउ, पढ़ै लिखै दिन रतिहा जाग।। रइपुर मा इस्नातक होइस, लेख प्रकाशित होवैं साथ। लइका मन ला शिक्षा देवँय, नित सहयोग बढ़ावँय हाथ।। करिस बिहाव सजाइस सपना, बाढ़त गिस हें तब परिवार । नोनी बाबू जनम लीन हें, पाइस सुंदर खुशी अपार।। शासकीय तब मिलिस नौकरी, गुरुजी बनिस पढ़ाइन पाठ। पंडरिया मा रहे लगिन हें, सब के सुग्घर राहय ठाठ।। पुस्तक 'पुरखा के इज्जत' अउ, 'माटी काया''तीज तिहार'। खूब मिलिस सम्मान छपे मा, साहित्य जगत दिहिन बड़ प्यार।। दो हजार सत्रह मा पाइस, अरुण निगम गुरुवर के हाथ। छंद लेखनी शुरू करिन हे, अपन निभाइस पूरा साथ।। साहित्य लेखन साथ करा के, बाँटिस वो बेटी ला ज्ञान। बेटी ला स...