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शिव शम्भू

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शिव शम्भू (ताटंक छंद) महादेव को जो भी पूजे , दर्शन देने आते हैं। शिव शम्भू भोले बाबा जी , महादेव कहलाते हैं।। जो भी मांगे सच्चे मन से , पूरा वह कर जाते हैं। श्रद्धा से जो फूल पान को , चरणों मे रख आते हैं।। औघड़ दानी शिव बाबा जी , महाकाल कहलाते हैं। जो संकट आये भक्तो पर , दूर सभी कर जाते हैं।। भक्ति भावना देख सभी का , भोले खुश हो जाते हैं। शिव शम्भू भोले बाबा जी , महादेव कहलाते हैं।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priyadewanganpriyu

बरखा रानी आई है

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बरखा रानी आई है *************** (ताटंक छंद) काले काले घनघोर घटा । देखो नभ पर छाई है।। झूम रही है सारी धरती। बरखा रानी आई है।। रिमझिम रिमझिम आसमान से। मोती भी बिखराई है।। सर सर सर सर पवन चले हैं। धरती भी मुस्काई है।। मोर पपीहा कूक रहें हैं। पंछी शोर मचाती है।। मीठी मीठी गीत सुनाकर। सबके मन को भाती है।। रंग बिरंगे फूल खिले हैं । बगिया को महकाती है।। झूम झूम कर फसलें सारे। खेतों में  लहराती है।। उमड़ घुमड़ कर गरजे बादल। बूंदे भी बरसाती है।। चम चम करके आसमान में। सारे नभ चमकाती है।। इंद्रधनुष की छटा देखकर  बच्चे खुश हो जाते हैं रंग बिरंगे देखे बादल  झूम झूम सब गाते हैं ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priyadewanganpriyu

स्वदेशी अपनाओ

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स्वदेशी अपनाओ (ताटंक छंद) छोड़ो रंग बिरंगी झालर । माटी दिया जलाबो जी , माल चाइना छोड़ो संगी स्वदेशी ल अपनाबो जी।। अपन देश के माटी ला हम । माथे तिलक लगाबो जी नवा नवा सामान बना के । स्वदेशी ल अपनाबो जी चीन देश ला पाछू छोड़व  भारत आघु बढ़ाबो जी , माल विदेशी ला नइ लेवन स्वदेशी ल अपनाबो जी।। नइ खावन अब पिज्जा बर्गर  । सादा भोजन खाबो जी , दूध दही अउ फल ला खाके शरीर  स्वस्थ बनाबो जी।। एप्प चाइना डिलीट करके । भारत मान बढ़ाओ जी अपन देश के माल खरीदो स्वदेशी अपनाओ जी।। प्रिया देवांगन *प्रियू* पंडरिया छत्तीसगढ़ Priyadewanganpriyu