बरखा रानी आई है
बरखा रानी आई है
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(ताटंक छंद)
काले काले घनघोर घटा ।
देखो नभ पर छाई है।।
झूम रही है सारी धरती।
बरखा रानी आई है।।
रिमझिम रिमझिम आसमान से।
मोती भी बिखराई है।।
सर सर सर सर पवन चले हैं।
धरती भी मुस्काई है।।
मोर पपीहा कूक रहें हैं।
पंछी शोर मचाती है।।
मीठी मीठी गीत सुनाकर।
सबके मन को भाती है।।
रंग बिरंगे फूल खिले हैं ।
बगिया को महकाती है।।
झूम झूम कर फसलें सारे।
खेतों में लहराती है।।
उमड़ घुमड़ कर गरजे बादल।
बूंदे भी बरसाती है।।
चम चम करके आसमान में।
सारे नभ चमकाती है।।
इंद्रधनुष की छटा देखकर
बच्चे खुश हो जाते हैं
रंग बिरंगे देखे बादल
झूम झूम सब गाते हैं ।।
प्रिया देवांगन "प्रियू"
पंडरिया
छत्तीसगढ़
Priyadewanganpriyu

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