काश मैं पंछी होती



काश मैं पंछी होती
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काश मैं एक पंछी होती,
मस्त गगन मे उड़ जाती ।
ताजा ताजा फल खाती,
सबको मीठी गीत सुनाती ।

जग की पूरी सैर करती,
नये नये दोस्त बनाती ।
नदी झील की पानी पीती,
वन उपवन में घूम आती ।

सुबह से उठ कर मैं चहचहाती,
मीठी नींद से सबको जगाती ।
सबके मन मे जगह बनाती,
जीवन मे खुशियाँ मैं लाती ।

उड़ कर अपनी मंजिल पाती,
हर मंजिल मैं उड़कर जाती ।
फल फूल मैं खूब खाती,
बच्चों के पास आ जाती ।

काश मैं एक पंछी होती,
मस्त गगन में उड़ पाती ।

प्रिया देवांगन "प्रियू"
पंडरिया
छत्तीसगढ़

Priyadewanganpriyu


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