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गणतंत्र

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  "गणतंत्र" पूरे भारत देश में, उड़े तिरंगा आज। रंग बिरंगे आसमां, हमको तुम पर नाज।। हमको तुम पर नाज, गीत खुशियों के गाते। धरा हमारी शान, साथ झंडा फहराते।। झूमे नाचे लोग, खुशी बिन रहे अधूरे। आता है जब पर्व, होत है सपने पूरे।। लिए तिरंगा हाथ में, फहराते सब साथ। भारत माँ के सामने, सभी झुकाते माथ।। सभी झुकाते माथ, नमन वीरो को करते। हुए देश बलिदान, वीर दुश्मन से लड़ते।। देश हुआ आजाद, फूल की बहती गंगा। भारत बने महान, फहरता आज तिरंगा।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priya Dewangan "Priyu"

किसान

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  *किसान* ********* खेतों में फसलें लहराते। अन्न किसान उगाते हैं।। कड़ी धूप में दिनभर रहते । तब वह भोजन खाते हैं।। बंजर धरती सोना उगले। कड़ी मेहनत करते हैं।। गर्मी ठंडी बरसातों में। नही किसी से डरते हैं।। फसल जीवन भर वे उगाते। तभी बैठ के खाते हैं।। बूँद पसीना रोज बहाते। तब वह घर पर आते हैं।। अब क्या होगा सोंच रहे हैं। अन्न कहाँ से लायेंगे।। घर में भूखे बच्चें सोते। भोजन कैसे खायेंगे।। कुछ तो दया दिखाओ भगवन। बच्चें भी अब रोते हैं।। अन्न नही है खाने को अब। भूखे रहकर सोते हैं।। प्रिया देवांगन *प्रियू* पंडरिया

कोरोना

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"कोरोना" (चौपाई) **************** आया भारत में कोरोना। हो गया मनुष्यों का रोना।। साबुन से हाथों को धोना। साफ सफाई करके सोना।। मुख में दिनभर मास्क लगावे। तभी घरों से बाहर जावे।। नही किसी से डरना यारों। साथ साथ तुम रहना प्यारों।। नही किसी से हाथ मिलाओ। दो गज की दूरी अपनाओ।। साफ सफाई करते रहना। सर्दी खाँसी तुम ना सहना।। काम काज सब बंद करावे। कोरोना को सभी हरावे।। धरती पर कोरोना आया। पूरी दुनिया में है छाया।। चीन देश लाई बीमारी। पहले उसकी आई बारी।। कोरोना को मार भगाओ। मिलकर के तुम इसे हराओ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

गन्ना पूजा

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  "गन्ना पूजा" छन्न पकैया छन्न पकैया , बाजारों में जाते। लम्बी लम्बी मोटी मोटी , मिलकर गन्ने लाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , भीड़ लगी है भारी। बाजारों में जाकर देखो , दिखती दुनिया सारी।। छन्न पकैया छन्न पकैया , एकादशी मनाते। सभी बनाते मिलकर मण्डप , तुलसी ब्याह रचाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , दीपक सभी जलाते। नये नये पकवान बनाकर , खुशी खुशी सब खाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मिलकर गन्ने खाते। झूम रहें हैं सारे बच्चे , घर घर खुशियाँ लाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया ,  श्रद्धा सुमन चढ़ाते। मिट जाये सब संकट सारे , आशीर्वाद बढ़ाते।। रचनाकार प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

करवाचौथ

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  चौपाई (करवाचौथ) करवा निर्जल व्रत है करती। भूख प्यास को वह है हरती।। रात चाँद की दर्शन करती। जीवन के सुख दुख को हरती।। सज धज नारी पूजा करती। प्यार पिया के हिय में भरती।। कानों में पहने सब बाली। माँगो में सजती है लाली।। रहे दीर्घ जीवी पति देवा। नित्य करूँ माँ  प्रभु की सेवा।। चरण स्पर्श आशीषें पाती। जीवन में खुशियाँ है लाती।। साजन सजनी लगते प्यारे। आँगन उतरे चाँद सितारे।। शिव गौरी को भोग लगाते। पकवानों से थाल सजाते।। शिव गौरी को नीर चढ़ाये। पति सँग पावन प्रीत बढ़ाये।। जनम जनम का साथ निभाये। घर आँगन में खुशियाँ लाये।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम  छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

नवरात्रि

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  "नवरात्रि" (कुण्डलियाँ) सजता सुंदर द्वार है , स्वागत करते लोग। माता रानी आत है , सभी लगाते भोग।। सभी लगाते भोग , भक्त जन करते सेवा। लेते आशीर्वाद , सभी पाते हैं मेवा।। सभी जलाते दीप , द्वार सुंदर  है लगता । आती माता रोज , घरों में दीपक सजता।।  आई सबके द्वार में , माता रानी आज। शीश झुकाते लोग हैं , बनते बिगड़े काज।। बनते बिगड़े काज , कामना पूरा करती। खुश होते हैं लोग ,  खुशी जीवन मेंभरती।। दीप जलाते लोग , दिलों में खुशियाँ छाई। सभी भक्त के साथ , द्वार में माता आई।। "माटी पुत्री"- प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan priyu

दीपक

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  दीपक (छन्न पकैया) छन्न पकैया छन्न पकैया , आओ दीप जलाये। जगमग हो जायेगा सारा , मिलकर द्वार सजाये।। छन्न पकैया छन्न पकैया , सबको रौशन करती। दूर हटाती अंधकार को ,  नही किसी से डरती।। छन्न पकैया छन्न पकैया , प्रभु चरणों में रहती। खुद जलकर रौशन है करती , कभी नही कुछ कहती।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मिलकर खुशी मनायें। मिट्टी की दीपक से हम सब , मिलकर सभी सजायें।। छन्न पकैया छन्न पकैया , जीवन ज्योति जलाओ। नेक कार्य कर आगे आओ , कभी नही घबराओ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu