Posts

गन्ना पूजा

Image
  "गन्ना पूजा" छन्न पकैया छन्न पकैया , बाजारों में जाते। लम्बी लम्बी मोटी मोटी , मिलकर गन्ने लाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , भीड़ लगी है भारी। बाजारों में जाकर देखो , दिखती दुनिया सारी।। छन्न पकैया छन्न पकैया , एकादशी मनाते। सभी बनाते मिलकर मण्डप , तुलसी ब्याह रचाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , दीपक सभी जलाते। नये नये पकवान बनाकर , खुशी खुशी सब खाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मिलकर गन्ने खाते। झूम रहें हैं सारे बच्चे , घर घर खुशियाँ लाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया ,  श्रद्धा सुमन चढ़ाते। मिट जाये सब संकट सारे , आशीर्वाद बढ़ाते।। रचनाकार प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

करवाचौथ

Image
  चौपाई (करवाचौथ) करवा निर्जल व्रत है करती। भूख प्यास को वह है हरती।। रात चाँद की दर्शन करती। जीवन के सुख दुख को हरती।। सज धज नारी पूजा करती। प्यार पिया के हिय में भरती।। कानों में पहने सब बाली। माँगो में सजती है लाली।। रहे दीर्घ जीवी पति देवा। नित्य करूँ माँ  प्रभु की सेवा।। चरण स्पर्श आशीषें पाती। जीवन में खुशियाँ है लाती।। साजन सजनी लगते प्यारे। आँगन उतरे चाँद सितारे।। शिव गौरी को भोग लगाते। पकवानों से थाल सजाते।। शिव गौरी को नीर चढ़ाये। पति सँग पावन प्रीत बढ़ाये।। जनम जनम का साथ निभाये। घर आँगन में खुशियाँ लाये।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम  छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

नवरात्रि

Image
  "नवरात्रि" (कुण्डलियाँ) सजता सुंदर द्वार है , स्वागत करते लोग। माता रानी आत है , सभी लगाते भोग।। सभी लगाते भोग , भक्त जन करते सेवा। लेते आशीर्वाद , सभी पाते हैं मेवा।। सभी जलाते दीप , द्वार सुंदर  है लगता । आती माता रोज , घरों में दीपक सजता।।  आई सबके द्वार में , माता रानी आज। शीश झुकाते लोग हैं , बनते बिगड़े काज।। बनते बिगड़े काज , कामना पूरा करती। खुश होते हैं लोग ,  खुशी जीवन मेंभरती।। दीप जलाते लोग , दिलों में खुशियाँ छाई। सभी भक्त के साथ , द्वार में माता आई।। "माटी पुत्री"- प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan priyu

दीपक

Image
  दीपक (छन्न पकैया) छन्न पकैया छन्न पकैया , आओ दीप जलाये। जगमग हो जायेगा सारा , मिलकर द्वार सजाये।। छन्न पकैया छन्न पकैया , सबको रौशन करती। दूर हटाती अंधकार को ,  नही किसी से डरती।। छन्न पकैया छन्न पकैया , प्रभु चरणों में रहती। खुद जलकर रौशन है करती , कभी नही कुछ कहती।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मिलकर खुशी मनायें। मिट्टी की दीपक से हम सब , मिलकर सभी सजायें।। छन्न पकैया छन्न पकैया , जीवन ज्योति जलाओ। नेक कार्य कर आगे आओ , कभी नही घबराओ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

मेरा मुर्गा

Image
  "मुर्गा बाँग लगाता है" *************** उठो प्यारे आँखे खोलो । सूरज दादा आये है।। लाल लाल किरणों के सँग में। सब में आश जगाये है।। मेरा मुर्गा है अलबेला। जल्दी से उठ जाता है।। कुड़कूँ कूँ आवाज लगा कर। नया सन्देश लाता है।। सुबह सुबह छत में चढ़ कर वह। कुकडू कूँ चिल्लाता है।। मुर्गी देखे मुर्गा राजा। गीत नया वह गाता है।। मुर्गियों का होता राजा। सैर रोज वह करता है।। चारे चुगता रहता दिनभर। फिर आहे वह भरता है।। सिर के ऊपर कलगी रखता। दिन भर  वह इठलाता है।। कूड़े कचरे में जा कर के। दाना खा कर आता है।। चूजों को अपने सँग लेकर। बड़े मजे से आता है।। सुबह सुबह जल्दी उठ कर के। मुर्गा बाँग लगाता है।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

कोरोना

Image
  छन्न पकैया (कोरोना) ****************** छन्न पकैया छन्न पकैया , आया है कोरोना बच्चे बूढ़े घर में बैठे , शुरू हुआ है रोना।। छन्न पकैया छन्न पकैया , अपना मुँहूँ छुपाये। बन्द हो गया आना जाना , दूरी सभी बनाये।। छन्न पकैया छन्न पकैया ,गर्म पियो सब पानी। करो नीम तुलसी का सेवन , इससे है जिनगानी।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मुँह में मास्क लगाना। कोरोना का काल चल रहा , सभी स्वच्छ अपनाना। छन्न पकैया छन्न पकैया , घर का भोजन खाना। दूध दही का सेवन करना ,तन को स्वस्थ बनाना।। प्रिया देवांगन *प्रियू* पंडरिया छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

बाढ़

Image
  "बाढ़" ****** प्रकृति का यही नियम है कि हर साल सभी जगहों पर बारिश होता है।हर साल कही न कही बाढ़ जैसे समस्या उत्पन्न होती है। हर साल सुनने को मिलता है कि किसी का घर बाढ़ आने से बह गया। कही किसी के बच्चें बाढ़ आने से अपने - अपने माँ - बाप , भाई- बहन से बिछुड़ गए। अक्सर यही सब सुनने को मिलता है । मछुवारें लोग ज्यादा से ज्यादा नदी या समुद्र के किनारे घर या छोटी सी झोपड़ी बना के रहते हैं । तेज बारिश होने के कारण समुद्र में उफान आने के कारण बाढ़ में लोग बह जाते हैं।  बारिश होने का इंतजार सभी लोग करते हैं।लेकिन जरूरत से ज्यादा बारिश हर लोगो को चिंताग्रस्त कर देता है। (मैं एक छोटी सी कहानी अपने लेख के द्वारा आप सभी को बताना चाहती हूँ) जब से सावन लगा था तब से पानी का गिरना बंद हो गया था। मैं और मेरे पिता जी अक्सर कहा करते थे कि ये तो सावन नही गर्मी का दिन लग रहा है । बहुत ही धूप और गर्मी रहता था। सावन में कभी कभी हल्का हल्का ही बारिश होता था। सावन खत्म होने के बाद अगस्त के महीने की शुरुआत हुई । अच्छा खासा सभी का दिन निकल रहा था। कभी हल्की हल्की बारिश की फुहार तो कभी ठंडी ठंडी हवा तो कभी सौ...