Posts

पितृ पक्ष

Image
  *रोला* *पितृ पक्ष* करते पूजा पाठ, पितर की करते सेवा। मन में श्रद्धा भाव, और खाते सब मेवा।। करते अर्पण नीर, देव को सभी मनातें। चाँवल जौ को साथ, हाथ लेकर सब जातें।। करतें पितृ को याद, साल में सब है आते। होते भगवन रूप, सभी अपने घर जाते।। छत के ऊपर बैठ, काग को भोग खिलातें। है पितरों का रूप, यहाँ हम सभी मनातें।। पुरखों को दो मान, नियम उनकी अपनाओ। मिलता है जी लाभ, हानि से नहिँ  घबराओ।। देते आशीर्वाद, खुशी जीवन में आते। बच्चें बूढ़े साथ, सदा यूँ साथ निभाते।। प्रिया देवांगन *प्रियू* छत्तीसगढ़ Priya Dewangan "priyu"

आल्हा छंद

Image
  "आल्हा छंद" *माटी जीवन परिचय* *माटी* ओम प्रकाश कहावय, धरती माँ के पूत सुजान। गाँव बोरसी पावन धरती, महकाइस जे स्वर्ग समान।। जन्मभूमि मा बचपन बीतिस, मानय माटी ला वो शान। धूर्रा माटी खेल कूद के, कदम बढ़ाइस सीना तान।। करिस पढ़ाई ध्यान लगा के, रहिस छात्र सुग्घर हुसियार। दिल जीतिस हे गुरुजी मन के, पाइस सब के प्यार दुलार।। कक्षा पंचम पहुँचत-पहुँचत, होगे साहित्य ले अनुराग। गीत कहानी रचे लगिस अउ, पढ़ै लिखै दिन रतिहा जाग।। रइपुर मा इस्नातक होइस, लेख प्रकाशित होवैं साथ। लइका मन ला शिक्षा देवँय, नित सहयोग बढ़ावँय हाथ।। करिस बिहाव सजाइस सपना, बाढ़त गिस हें तब परिवार । नोनी बाबू जनम लीन हें, पाइस सुंदर खुशी अपार।। शासकीय तब मिलिस नौकरी, गुरुजी बनिस पढ़ाइन पाठ। पंडरिया मा रहे लगिन हें, सब के सुग्घर राहय ठाठ।। पुस्तक 'पुरखा के इज्जत' अउ, 'माटी काया''तीज तिहार'। खूब मिलिस सम्मान छपे मा, साहित्य जगत दिहिन बड़ प्यार।। दो हजार सत्रह मा पाइस, अरुण निगम गुरुवर के हाथ। छंद लेखनी शुरू करिन हे, अपन निभाइस पूरा साथ।। साहित्य लेखन साथ करा के, बाँटिस वो बेटी ला ज्ञान। बेटी ला स...

चिड़ियों की बातें

Image
*चिड़ियों की बातें सहम गए यूँ सारे पक्षी। चीं चीं करना छोड़ दिये।। मानव के हालात देखकर। रब से रिश्ता तोड़ दिये।। एक डाल पर बैठे सारे। मन ही मन क्या सोच रहें। भूख लगी है फिर भी देखो। जाने से संकोच रहें।। फैल रहा है कहर शहर में। हर तरफ मौत साया है। पक्षी सारे सहम गये है। ये कैसा दिन आया है।। एक दुजे को देख देख कर। अपनी भाषा बोल रहें। मिल कर बैठे सारे साथी। उलझन सारी खोल रहें।। प्रिया देवांगन *प्रियू* छत्तीसगढ़

गणतंत्र

Image
  "गणतंत्र" पूरे भारत देश में, उड़े तिरंगा आज। रंग बिरंगे आसमां, हमको तुम पर नाज।। हमको तुम पर नाज, गीत खुशियों के गाते। धरा हमारी शान, साथ झंडा फहराते।। झूमे नाचे लोग, खुशी बिन रहे अधूरे। आता है जब पर्व, होत है सपने पूरे।। लिए तिरंगा हाथ में, फहराते सब साथ। भारत माँ के सामने, सभी झुकाते माथ।। सभी झुकाते माथ, नमन वीरो को करते। हुए देश बलिदान, वीर दुश्मन से लड़ते।। देश हुआ आजाद, फूल की बहती गंगा। भारत बने महान, फहरता आज तिरंगा।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ Priya Dewangan "Priyu"

किसान

Image
  *किसान* ********* खेतों में फसलें लहराते। अन्न किसान उगाते हैं।। कड़ी धूप में दिनभर रहते । तब वह भोजन खाते हैं।। बंजर धरती सोना उगले। कड़ी मेहनत करते हैं।। गर्मी ठंडी बरसातों में। नही किसी से डरते हैं।। फसल जीवन भर वे उगाते। तभी बैठ के खाते हैं।। बूँद पसीना रोज बहाते। तब वह घर पर आते हैं।। अब क्या होगा सोंच रहे हैं। अन्न कहाँ से लायेंगे।। घर में भूखे बच्चें सोते। भोजन कैसे खायेंगे।। कुछ तो दया दिखाओ भगवन। बच्चें भी अब रोते हैं।। अन्न नही है खाने को अब। भूखे रहकर सोते हैं।। प्रिया देवांगन *प्रियू* पंडरिया

कोरोना

Image
"कोरोना" (चौपाई) **************** आया भारत में कोरोना। हो गया मनुष्यों का रोना।। साबुन से हाथों को धोना। साफ सफाई करके सोना।। मुख में दिनभर मास्क लगावे। तभी घरों से बाहर जावे।। नही किसी से डरना यारों। साथ साथ तुम रहना प्यारों।। नही किसी से हाथ मिलाओ। दो गज की दूरी अपनाओ।। साफ सफाई करते रहना। सर्दी खाँसी तुम ना सहना।। काम काज सब बंद करावे। कोरोना को सभी हरावे।। धरती पर कोरोना आया। पूरी दुनिया में है छाया।। चीन देश लाई बीमारी। पहले उसकी आई बारी।। कोरोना को मार भगाओ। मिलकर के तुम इसे हराओ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu

गन्ना पूजा

Image
  "गन्ना पूजा" छन्न पकैया छन्न पकैया , बाजारों में जाते। लम्बी लम्बी मोटी मोटी , मिलकर गन्ने लाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , भीड़ लगी है भारी। बाजारों में जाकर देखो , दिखती दुनिया सारी।। छन्न पकैया छन्न पकैया , एकादशी मनाते। सभी बनाते मिलकर मण्डप , तुलसी ब्याह रचाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , दीपक सभी जलाते। नये नये पकवान बनाकर , खुशी खुशी सब खाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया , मिलकर गन्ने खाते। झूम रहें हैं सारे बच्चे , घर घर खुशियाँ लाते।। छन्न पकैया छन्न पकैया ,  श्रद्धा सुमन चढ़ाते। मिट जाये सब संकट सारे , आशीर्वाद बढ़ाते।। रचनाकार प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम छत्तीसगढ़ Priya Dewangan Priyu