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राखी के तिहार

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राखी के तिहार ************** सुन्ना होगे मोर घर अँगना ,सुन्ना होगे मोर दुवारी। एसो के राखी में भइया ,कइसे सजाहू तोर बर थारी।। देखत रेहेंव रस्ता तोरे , मोर भइया हा आही। आ के अपन कलाई म , मोर से राखी बन्धवाही।। किसम किसम के मिठाई अउ , मेवा ल खवाहू। दीपक अउ टिका ल , थारी में सुग्घर सजाहू।। मन ह मोर उदास होगे , सुन्ना होगे मोर दुवारी। एसो के राखी में भइया , कइसे सजाहू तोर बार थारी।। जब ले आहे कोरोना ह , कुछु तिहार बने नई लागत। अतेक दिन तो होगे संगी , बीमारी काबर नई भागत।। सिट्ठा सिट्ठा लागत तिहार , मजा नइ आवत हे। रोटी पिठा चीला सोहारी , कुछु नइ भावत हे।। काबर नइ आवत हस भइया , एसो के राखी म। रास्ता देखत देखत भर गे , पानी मोर आँखी म।। मन मोर उदास होगे , सुन्ना होगे मोर दुवारी। एसो के राखी मे भइया , कइसे सजाहू तोर बर थारी।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़

बचपन

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बचपन  ********* बचपन कितना सुहाना था  , सुबह होती स्कूल जाते । थक कर आते , फिर भी खेलने जाते ।। न किसी का बोझ सहना , न किसी  पर बोझ थे हम। छोटी छोटी बातों में रोना , छोटी सी बातों में हँसते थे हम।। न रोने की वजह थी ,न हँसने का बहाना था। बारिश की फुहार से , खेलना अच्छा लगता था।। कागज की नाव बना कर , कितने खुश हो जाते थे। बच्चों के संग मम्मी पापा, बच्चे बन जाते थे।। थोड़ी सी बातों में रूठना, फिर सबका मनाना कितना अच्छा लगता था। न किसी की फिक्र थी , न किसी का गम था।। कहां गया वो बचपन हमारा , जिसमें खुशियों का खजाना था। बचपन कितना सुहाना था , बचपन कितना सुहाना था ।। प्रिया देवांगन " प्रियू"  राजिम जिला - गरियाबंद (छत्तीसगढ़) PRIYADEWANGANPRIYU

मेरी डायरी

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मेरी डायरी *********** गर्मी के तपन धूप में भी , काम करते हैं वे लोग। जीवन के कठिन डगर में , हौसला रखते हैं वे लोग।। कितना मुश्किल हो गया है , एक एक पल जीना। कैसे रहतें है वो लोग , अपने परिवारों के बिना।। मैं उस इंसान के बारे में , दर्द ए बयां करती हूँ। अपनी डायरी के पन्नो में ,  हौसला कैद करती हूँ।। आज महामारी के जंग से , यही लोग लड़ रहे हैं। अपनी जिंदगी जीने के लिये , आज उमड़ रहे हैं।। अस्पतालों में भगवान का रूप , लिये खड़े हैं। कोरोना को हराने के लिये , सभी लोग अड़े है।। देश के वीर जवान और डॉक्टरों को नमन करती हूं। अपनी डायरी के पन्नों में ,  हौसला कैद करती हूँ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ PRIYADEWANGANPRIYU

हरेली तिहार

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हरेली तिहार आ गे  *************** हरेली तिहार हा आगे संगी ,  हरियाली हा छाये । रापा कुदारी धरके संगी , खेत डहर सब जाये।। हरेली के तिहार ल , किसान खुशी से मनाथे । बिहनिया ले उठ के सब , चीला चढ़ाये ल जाथे।। हाँसी खुशी से तिहार मनाथे , धरती के पूजा करथे। झन होवय नुकसान कहिके,  प्रार्थना सब झन करथे।। सांप हा आथे कहिके , खेत मा दूध मढ़ाथे । दूध ल देखथे ताहन , बिलई पी के भाग जाथे।। बिहनिया ले उठ के लइका , डारा खोंचे ला जाथे । डारा खोंचके लइका मन , पइसा अब्बड़ पाथे ।। गेड़ी चढ़े के तिहार हरे संगी  , साल मा एक बार आथे। सबो लइका जुर मिल के  , गेड़ी तिहार मनाथे।। रचना  प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया PRIYADEWANGANPRIYU

कोरोना से डरो नही

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कोरोना से डरो नहीं **************** फैल रहा है कोरोना वाइरस , इसका तुम करो उपाय। बीमारी को तुम दूर भगाओ , ठंडा चीज को हाथ न लगाओ।। गर्म चीज का करो तुम सेवन , स्वास्थ रहेगा तुम्हारा जीवन। हाय हैलो से मुँह को मोड़ो , नमस्ते से तुम नाता जोड़ो। भीड़ भाड़ में नही है जाना , वाइरस को दूर भगाना।। नाक कान को ढक कर चलना , हाथ को साबुन से मलना।। सर्दी खासी है इसके लक्षण , मांस का तुम करो न भक्षण। खान पान का ध्यान तुम रखना , ठंडी चीज को नही है चखना।। सर्दी खासी आये तो , डॉक्टर पास तुरंत है जाना। कोरोना वाइरस को  दूर भगाना।। कोरोना है महामारी रोग , सुबह शाम करो तुम योग। कोरोना को सब दूर भगाओ , सादा जीवन को अपनाओ।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया छत्तीसगढ़ PRIYADEWANGANPRIYU

सावन झूला

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सावन झूला  *********** सावन महीना आ गे संगी , चलव झूला झुलबो । सखी सहेली सबो संगी,  एके जगा मा मिलबो । अब्बड़ मजा आही बहिनी , जब झूला मा झुलबो । जाबो अमरइया के तीर मा , एके जगा सब मिलबो । मंदिर जाबो सबो झन हा , शिव भोला ल मनाबो । दूध दही अउ नरियर भेला, मन श्रद्धा से चढाबो । औघड़ दानी शिव भोला हे , सब ला देथे वरदान । नियम पूर्वक श्रद्धा से,  करथे जे ओकर  मान । सावन के सोमवारी मा , रहिबो हम उपवास । जल चढाबो रोज के, पूरा करही आस । रचना  प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  (कवर्धा ) छत्तीसगढ़  PRIYADEWANGANPRIYU

मोबाइल के जमाना

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मोबाइल  ***************** आज काल मोबाइल के जमाना हे , सबो काम इही म होवत हे। चलात हावय दिन भर ,  अऊ उही ल धर के सोवत हे। सरकार ह फोकट म मोबाइल बांटत , जनता मन ह खुश होगे हे। 6 महिना के रिचार्ज करवा के , बेलेंस ल भरवा दे हे। काम बूता कुछ करना नइहे ,  दिन भर मोबाइल चलावत हे। वाटसप अऊ फेसबुक ल देखके , मुसुर मुसुर मुस्कावत हे। आजकल छोटे लागे न बड़े ,  सबो झन करा मोबाइल हे। दिन भर बिजी रहिथे, सबो के चेहरा म स्माइल हे। इयर फोन ल लगाके , रात दिन सुनत रहिथे गाना। टूरा अब्बड़ बिगड़ गेहे, कमाना न धमाना। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  जिला - कबीरधाम  PRIYADEWANGANPRIYU