सावन झूला




सावन झूला 
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सावन महीना आ गे संगी , चलव झूला झुलबो ।
सखी सहेली सबो संगी,  एके जगा मा मिलबो ।
अब्बड़ मजा आही बहिनी , जब झूला मा झुलबो ।
जाबो अमरइया के तीर मा , एके जगा सब मिलबो ।
मंदिर जाबो सबो झन हा , शिव भोला ल मनाबो ।
दूध दही अउ नरियर भेला, मन श्रद्धा से चढाबो ।
औघड़ दानी शिव भोला हे , सब ला देथे वरदान ।
नियम पूर्वक श्रद्धा से,  करथे जे ओकर  मान ।
सावन के सोमवारी मा , रहिबो हम उपवास ।
जल चढाबो रोज के, पूरा करही आस ।

रचना 
प्रिया देवांगन "प्रियू"
पंडरिया  (कवर्धा )
छत्तीसगढ़ 

PRIYADEWANGANPRIYU



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