स्वदेशी अपनाओ
स्वदेशी अपनाओ
(ताटंक छंद)
छोड़ो रंग बिरंगी झालर ।
माटी दिया जलाबो जी ,
माल चाइना छोड़ो संगी
स्वदेशी ल अपनाबो जी।।
अपन देश के माटी ला हम ।
माथे तिलक लगाबो जी
नवा नवा सामान बना के ।
स्वदेशी ल अपनाबो जी
चीन देश ला पाछू छोड़व
भारत आघु बढ़ाबो जी ,
माल विदेशी ला नइ लेवन
स्वदेशी ल अपनाबो जी।।
नइ खावन अब पिज्जा बर्गर ।
सादा भोजन खाबो जी ,
दूध दही अउ फल ला खाके
शरीर स्वस्थ बनाबो जी।।
एप्प चाइना डिलीट करके ।
भारत मान बढ़ाओ जी
अपन देश के माल खरीदो
स्वदेशी अपनाओ जी।।
प्रिया देवांगन *प्रियू*
पंडरिया
छत्तीसगढ़
Priyadewanganpriyu

बहुत बढ़िया रचना
ReplyDeleteबधाई हो
Thank you
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