जल का महत्व


जल का महत्व  
(दोहा)

सूख गये जंगल सभी , मचा रहें सब शोर।
काटो मत अब पेड़ को , सूखा जल चहुँओर।।

त्राहि त्राहि मानव करे , सूखी नदियाँ ताल।
तड़प तड़प सब मर रहे ,  हाल हुआ बेहाल।।

हाथों में मटका लिये , करते पानी आस।
पैदल चल कर जा रहे ,  पानी करे तलाश।।

लगा हुआ है नवतपा , बढ़ती गर्मी रोज।
पंछी सारे प्यास में , करते पानी खोज।।

भास्कर भी अब क्रोध से , उगले मुँह से आग।
दिन सन्नाटे से भरा , गये लोग भी भाग।।

जीवन जल अनमोल है , जग का है ये अंग।
वृक्ष बिना जीवन सभी , हो जायेगा भंग।।

देखो पानी का हुआ , कैसे यारों हाल।
सूख रही धरती सभी , लोग हुये बेहाल।।

प्रिया देवांगन "प्रियू"
पंडरिया
जिला - कबीरधाम 
छत्तीसगढ़

Priyadewanganpriyu

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