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जल का महत्व

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जल का महत्व   (दोहा) सूख गये जंगल सभी , मचा रहें सब शोर। काटो मत अब पेड़ को , सूखा जल चहुँओर।। त्राहि त्राहि मानव करे , सूखी नदियाँ ताल। तड़प तड़प सब मर रहे ,  हाल हुआ बेहाल।। हाथों में मटका लिये , करते पानी आस। पैदल चल कर जा रहे ,  पानी करे तलाश।। लगा हुआ है नवतपा , बढ़ती गर्मी रोज। पंछी सारे प्यास में , करते पानी खोज।। भास्कर भी अब क्रोध से , उगले मुँह से आग। दिन सन्नाटे से भरा , गये लोग भी भाग।। जीवन जल अनमोल है , जग का है ये अंग। वृक्ष बिना जीवन सभी , हो जायेगा भंग।। देखो पानी का हुआ , कैसे यारों हाल। सूख रही धरती सभी , लोग हुये बेहाल।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम  छत्तीसगढ़ Priyadewanganpriyu

मानसून

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मानसून दोहा मानसून है आ गया , छाय घटा घनघोर। बिजली कड़के जोर से , वन में नाचे मोर।। पानी गिरते रोज के , हर्षित हुए किसान। उपजाते है खेत में , लहराते हैं धान।। चली हवाएँ जोर से , पक्षी करते शोर। चले किसानी कार्य को , होते ही वह भोर।। झूमें गायें लोग सब , आते ही बरसात । फसल उगाने आज सब , करे कार्य दिन रात।। मानसून की आहटें , मन को खुश कर जाय। हरियाली चहुँ ओर हैं , फसलें भी लहराय।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया जिला - कबीरधाम  छत्तीसगढ़ Priyadewanganpriyu

आया नया सवेरा

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आया नया सवेरा दोहा नया सवेरा आ गया , सबको करुं प्रणाम। आओ मिलजुल कर करें , पूरा हो सब काम।। फूल खिले हैं बाग में , भौरें भी मँडराय । नया सबेरा छा गया , पंछी गाना गाय।। निकला सूरज भोर में , सारा जग चमकाय। नदियाँ कल कल बह रही , झरनें भी लहराय।। धरती माता हँस रही , पत्ते शोर मचाय। तितली रानी उड़ रही , बागों पर इठलाय।। कोयल कूके पेड़ में , मीठी गीत सुनाय। ताजा ताजा फल लगे , सारे मिलकर खाय।। प्रिया देवांगन "प्रियू" पंडरिया  छत्तीसगढ़